महायोगी गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखपुर सनातन परंपरा का एक प्राचीन और पावन केंद्र रहा है

लखनऊ। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर का प्रथम दीक्षांत समारोह देश की मा० राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मा० राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मा० मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। समारोह में राष्ट्रपति महोदया ने संस्थान के मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ एवं पदक प्रदान किए, जबकि राज्यपाल महोदया ने विद्यार्थियों को समर्पण, अनुशासन एवं मानवीय संवेदनाओं के साथ स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित किया। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई दी और कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण के मूल्यों के प्रति हमारी निष्ठा को दोहराने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए संस्थान के सभी डॉक्टरों, नर्सों, छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि “एम्स” शब्द सुनते ही उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएँ, आधुनिक तकनीक और समर्पित डॉक्टर्स की छवि आँखों के सामने उभर आती है। एम्स संस्थान भारत की चिकित्सा क्षमता का प्रतीक हैं, जिन्होंने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में उच्चतम मानक स्थापित किए हैं और नवाचार को अपनी कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग बना लिया है।


राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि देश के पहले एम्स की स्थापना जिस उद्देश्य से की गई थी, उस उद्देश्य को आज सभी एम्स संस्थानों ने सफलतापूर्वक पूरा किया है। आज एम्स गुणवत्ता, नवाचार और सेवा का केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से एम्स गोरखपुर की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और सुलभ चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और सस्ती तथा सहज स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह का आयोजन हो रहा है, तब हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस भूमि पर यह भव्य संस्थान खड़ा है, उसके पीछे न केवल सरकार की दूरदृष्टि है, बल्कि उन किसानों का त्याग भी जुड़ा है, जिन्होंने अपनी बहुमूल्य भूमि इसके लिए दी है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं किसान की बेटी हैं और खेतों में काम कर जीवन जिया है, इसलिए जानती हैं कि जमीन किसी किसान के लिए केवल मिट्टी नहीं, उसकी आजीविका, आत्मसम्मान और पीढ़ियों का सहारा होती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे इस बात को सदैव स्मरण रखें कि जिनका त्याग इस संस्थान की नींव है, उनके प्रति संवेदना और कृतज्ञता का भाव बनाए रखें। यदि कभी कोई गरीब महिला या किसान सहायता के लिए आए, तो उसे निराश न करें। यह भवन, यह शिक्षा यह सब किसी के बलिदान से संभव हुआ है। आज का यह दीक्षांत समारोह उसी सेवा और त्याग को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जब कोई संस्थान बनता है, तो उसकी नींव में केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि अनेक व्यक्तियों का त्याग और संघर्ष छिपा होता है, विशेषकर किसानों का, जिनकी भूमि पर ऐसे संस्थानों की संरचना होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्मरण कराया कि जिन खेतों की उपज से कोई किसान अपने परिवार का पालन करता है, वही ज़मीन जब सार्वजनिक हित में दी जाती है, तो वह एक बहुत बड़ा बलिदान होता है। राज्यपाल ने हाल ही में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात के अपने दौरे का अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार वहाँ के विद्यार्थियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों में सराहनीय योगदान दिया है।

राज्यपाल महोदया ने अपने संबोधन में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज दीक्षांत समारोहों में जब पुरस्कार वितरित किए जाते हैं, तो अवार्ड प्राप्त करने वालों में बेटियों की संख्या अधिकांश होती है। यह इस बात का प्रमाण है कि 21वीं सदी वास्तव में महिलाओं की सदी बन रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रश्न शोध का विषय भी बन गया है कि लड़कियाँ निरंतर आगे क्यों बढ़ रही हैं। राज्यपाल महोदया ने इसे देश के भविष्य के लिए शुभ संकेत बताया और कहा कि जब तक नारी शक्ति राष्ट्र निर्माण में पूरी भागीदारी नहीं निभाएगी, तब तक भारत समग्र रूप से विकसित नहीं हो सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के उस सूत्र को उद्धृत कीकिया जिसमें कहा गया है कि “महिला सशक्तिकरण के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है।“ उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे गुजरात में कार्यकाल के दौरान उन्होंने देखा कि चाहे वह कोई मजदूर महिला हो या सामान्य ग्रामीण महिला, वह कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए भी ऊँचाइयों तक पहुँचने की शक्ति रखती है। ऐसी महिलाएँ समाज को दिशा देती हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बनती हैं। इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखपुर सनातन परंपरा का एक प्राचीन और पावन केंद्र रहा है, जिसकी आध्यात्मिक ऊर्जा ने देश-दुनिया को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भगवान बुद्ध, संत कबीर, भगवान महावीर तथा श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या व बाबा विश्वनाथ की पावन काशी जैसे तीर्थ स्थलों से घिरा है, जो इसकी सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इंसेफेलाइटिस जैसी भयावह बीमारी के उन्मूलन के लिए प्रभावी कार्य हुआ। इसी क्रम में यहां एम्स की स्थापना का संकल्प लिया गया। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर अब न केवल पूर्वांचल बल्कि पश्चिम उत्तर बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों की आबादी को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे इस संघर्ष और विकास यात्रा के साक्षी व सहभागी रहे हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री, भारत सरकार, अनुप्रिया पटेल, सांसद गोरखपुर रवि किशन, सांसद सलेमपुर रमाशंकर विद्यार्थी, अध्यक्ष एम्स गोरखपुर देश दीपक वर्मा, कार्यकारी निदेशक एवं सी०ई०ओ० एम्स गोरखपुर मेजर जनरल (डॉ०) विभा दत्ता, संकाय सदस्यगण, अभिभावकगण, विद्यार्थी सहित अन्य महानुभाव उपस्थित रहे।