समावेशी साहित्य संस्थान के स्थापना दिवस पर अखिलेश निगम "अखिल" की पुस्तकों का हुआ भव्य लोकार्पण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ (निराला सभागार) में कार्यक्रम की शुरुआत विशिष्ट अतिथि आशुतोष कुमार एवं अखिलेश निगम द्वारा मां सरस्वती को दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मंच पर उपस्थित सभी गण मान्य अतिथियों को अंग वस्त्र प्रदान कर सभी का स्वागत एवं अभिनंदन किया। समावेशी साहित्य संस्थान के तत्वधान में प्रख्यात साहित्यकार एवं पुलिस महानिरीक्षक अखिलेश निगम "अखिल" की दो पुस्तकों का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ।


कार्यक्रम में अखिलेश निगम के कहानी संग्रह अपने-अपने  तर्क (प्रभात प्रकाशन) तथा समीक्षा ग्रंथ अखिल का साहित्य मनन एवं मूल्यांकन का लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम हुआ। साथ ही समावेशी साहित्य संस्थान का स्थापना दिवस मनाया गया तथा संस्था के शुभंकर (logo) को भी लोकार्पित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में विनोद कुमार सिंह पुलिस महानिदेशक सी0आई0डी0 ने अखिलेश निगम के विभागीय कार्यों के साथ-साथ साहित्य सृजन की विलक्षण क्षमता की भूरि - भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि विभागीय व्यवस्था के बीच साहित्य लेखन के लिए समय निकालना बहुत कठिन है। अति विशिष्ट के रूप में आशुतोष कुमार अपर पुलिस महानिदेशक सी0आई0डी0 ने अखिल के व्यक्तित्व और साहित्य दोनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि अखिलेश निगम का व्यक्तित्व अत्यंत सरल एवं अहंकार शून्य है। इस प्रकार इनका साहित्य भी पाठकों के लिए सरल सहज एवं रोचक है।

उड़ीसा से पधारे उमेश कुमार प्रजापति अलग ने नवगठित समावेशी साहित्य संस्थान की स्थापना के लक्ष्य एवं उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी तथा प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह डॉ दिनेश अवस्थी, डॉ अमित दुबे, तरुण प्रकाश ने लोकार्पित होने वाले पुस्तकों की सारगर्भित समीक्षा की कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर हरिशंकर मिश्रा ने अखिल के साहित्य के प्रत्येक विद्या में किए जा रहे महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया।

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